हिमाचल प्रदेश में नशे की समस्या दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है। खासकर चिट्टा (हेरोइन) ने राज्य के युवाओं के जीवन को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। इस बढ़ती समस्या को रोकने और युवाओं को नशे के दलदल से बाहर निकालने के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री श्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने 79वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के अवसर पर मंडी जिले के सरकाघाट में Anti-Chitta Volunteer Scheme की घोषणा की। इस योजना का मुख्य उद्देश्य नशे की रोकथाम में जनता की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है।
इस योजना के तहत प्रशिक्षित वॉलंटियर्स (स्वयंसेवक) जनता और पुलिस के बीच सेतु का कार्य करेंगे। ये वॉलंटियर्स न केवल नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाएँगे, बल्कि गुप्त सूचना एकत्र कर पुलिस और प्रशासन को उपलब्ध कराएँगे। बदले में, सरकार इन वॉलंटियर्स को प्रोत्साहन (इंसेंटिव) भी देगी।
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Anti-Chitta Volunteer Scheme की घोषणा और पृष्ठभूमि
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस योजना की घोषणा स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि—
- हिमाचल प्रदेश में नशे का दुष्प्रभाव युवाओं पर सबसे अधिक है।
- सरकार का लक्ष्य है कि किसी भी कीमत पर युवाओं को चिट्टा और अन्य मादक पदार्थों से बचाया जाए।
- इसके लिए जनता की भागीदारी जरूरी है और यह योजना उसी दिशा में उठाया गया कदम है।
इसके साथ ही उन्होंने यह भी घोषणा की कि:
- “नशा मुक्ति रोकथाम एवं पुनर्वास बोर्ड” (Nasha Mukti Roktham and Punarvas Board) का गठन किया जाएगा, जिसमें सरकारी विभागों के विशेषज्ञ, समाजशास्त्री और NGOs को शामिल किया जाएगा।
- ग्राम और पंचायत स्तर पर एंटी-ड्रग कमेटियाँ बनाई जाएँगी।
- इन समितियों में पंचायत सचिव, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा वर्कर और एक पुलिस कांस्टेबल शामिल होंगे।
- नियमित बैठकें होंगी और रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को भेजी जाएगी ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।
Anti-Chitta Volunteer Scheme के उद्देश्य
- नशा रोकथाम – युवाओं को चिट्टा और अन्य मादक पदार्थों से बचाना।
- जनता और पुलिस के बीच सहयोग – वॉलंटियर्स जनता की समस्याएँ और सूचनाएँ पुलिस तक पहुँचाएँगे।
- जागरूकता अभियान – समाज में नशे के खिलाफ माहौल तैयार करना।
- गोपनीय सूचना – नशे का कारोबार करने वालों की जानकारी पुलिस तक पहुँचाना।
- पुनर्वास की दिशा में काम – प्रभावित लोगों को सही मार्गदर्शन और पुनर्वास सुविधाएँ उपलब्ध कराना।
Anti-Chitta Volunteer की भूमिका
इस Anti-Chitta Volunteer Scheme में जुड़ने वाले वॉलंटियर्स को खास भूमिका निभानी होगी।
- गाँव, कस्बों और शहरों में जागरूकता अभियान चलाना।
- युवाओं और अभिभावकों को नशे के दुष्परिणामों के बारे में समझाना।
- नशे का कारोबार करने वालों की गतिविधियों पर नज़र रखना।
- पुलिस और प्रशासन को गोपनीय रूप से सूचना उपलब्ध कराना।
- नशा मुक्ति कार्यक्रमों में सक्रिय भाग लेना।
- पुनर्वास केंद्रों में प्रभावित युवाओं को समर्थन और मार्गदर्शन देना।
वॉलंटियर्स को मिलने वाले प्रोत्साहन
हिमाचल प्रदेश सरकार ने साफ किया है कि इस योजना में शामिल होने वाले वॉलंटियर्स को उनके काम के बदले इंसेंटिव (प्रोत्साहन) दिया जाएगा।
- यह प्रोत्साहन नकद राशि या अन्य सुविधा के रूप में हो सकता है।
- इससे वॉलंटियर्स को लगातार प्रेरणा मिलेगी और वे सक्रिय रूप से कार्य करेंगे।
आवेदन और जुड़ने की प्रक्रिया
यदि आप हिमाचल प्रदेश के निवासी हैं और इस योजना से जुड़ना चाहते हैं तो प्रक्रिया बहुत सरल है।
आवेदन प्रक्रिया:
- नज़दीकी पुलिस स्टेशन जाएँ।
- संबंधित अधिकारी से “एंटी-चिट्टा वॉलंटियर योजना” में जुड़ने की इच्छा व्यक्त करें।
- पुलिस व प्रशासन आपकी पात्रता जाँचेंगे।
- चयनित होने पर आपको प्रशिक्षण (ट्रेनिंग) दी जाएगी।
- प्रशिक्षण के बाद आप वॉलंटियर के रूप में काम करना शुरू कर सकते हैं।
ऑनलाइन विवरण देखना
- अधिक जानकारी के लिए आप HP Police Citizen Portal पर भी विजिट कर सकते हैं।
- वहाँ से योजना से जुड़ी आधिकारिक जानकारी और दिशा-निर्देश मिलेंगे।
Anti-Chitta Volunteer Scheme की प्रमुख विशेषताएँ
फीचर | विवरण |
---|---|
योजना का नाम | Anti-Chitta Volunteer Scheme |
घोषणा करने वाले | मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू |
घोषणा का अवसर | 79वाँ स्वतंत्रता दिवस, सरकाघाट (मंडी) |
उद्देश्य | युवाओं को नशे से बचाना और जनता की भागीदारी सुनिश्चित करना |
वॉलंटियर्स की भूमिका | जागरूकता फैलाना, गुप्त सूचना जुटाना, पुलिस को जानकारी देना |
प्रोत्साहन | वॉलंटियर्स को इंसेंटिव दिया जाएगा |
संबद्ध कदम | नशा मुक्ति रोकथाम एवं पुनर्वास बोर्ड का गठन, पंचायत स्तर पर समितियाँ |
हिमाचल प्रदेश सरकार की अन्य योजनाएँ
हिमाचल प्रदेश सरकार समय-समय पर युवाओं, महिलाओं और किसानों के लिए नई-नई योजनाएँ लागू करती रहती है। एंटी-चिट्टा वॉलंटियर योजना भी इन्हीं में से एक है। इसके अलावा हाल ही में सरकार ने:
- ओल्ड पेंशन स्कीम
- कृषक कल्याण योजनाएँ
- महिला उत्थान कार्यक्रम
- रोजगार सृजन योजनाएँ
भी लागू की हैं।
नशे के खिलाफ सामूहिक लड़ाई

यह Anti-Chitta Volunteer Scheme सिर्फ सरकार की पहल नहीं है, बल्कि समाज की जिम्मेदारी भी है।
- अगर जनता और प्रशासन एक साथ काम करेंगे तो नशे के कारोबारियों को राज्य से खत्म किया जा सकता है।
- हर नागरिक को इसमें अपनी भूमिका निभानी होगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q.1 Anti-Chitta Volunteer Scheme क्या है?
यह हिमाचल प्रदेश सरकार की योजना है जिसके तहत वॉलंटियर्स को नशे के खिलाफ अभियान में जोड़ा जाएगा।
Q.2 इस Anti-Chitta Volunteer Scheme की घोषणा किसने और कब की?
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इसे 79वें स्वतंत्रता दिवस (सरकाघाट, मंडी) पर घोषित किया।
Q.3 वॉलंटियर्स की भूमिका क्या होगी?
जागरूकता फैलाना, गुप्त सूचना जुटाना और पुलिस को जानकारी देना।
Q.4 क्या वॉलंटियर्स को कोई सहयोग मिलेगा?
हाँ, सरकार की ओर से प्रोत्साहन (इंसेंटिव) दिया जाएगा।
Q.5 आवेदन कैसे करें?
आप अपने नज़दीकी पुलिस स्टेशन जाकर योजना में जुड़ने की इच्छा जता सकते हैं।
निष्कर्ष
HP Anti-Chitta Volunteer Scheme 2025 राज्य के युवाओं को नशे से बचाने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की एक ऐतिहासिक पहल है। इस योजना से न केवल पुलिस को सहयोग मिलेगा, बल्कि समाज में नशे के खिलाफ माहौल भी बनेगा।
यदि आप हिमाचल प्रदेश के निवासी हैं और नशे के खिलाफ आवाज़ उठाना चाहते हैं, तो इस योजना से जुड़कर अपने समाज और आने वाली पीढ़ी को बचाने में योगदान दे सकते हैं।
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